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कर स्वर्ग | Tax heavens | एचएनआई भारत क्यों छोड़ रहे हैं ? Why HNIs are leaving india ?

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                        टैक्स  हेवन  क्या है?  कई देशों और क्षेत्रों में, आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों को आकर्षित करने के लिए कर और गैर-कर प्रोत्साहन का उपयोग किया जाता है। ऐसे देश या क्षेत्र विदेशी निवेशकों को एक ऐसा वातावरण प्रदान करते हैं, जहां या तो कर बिल्कुल नहीं होते या केवल नाममात्र का कर लिया जाता है । इसके साथ ही, वहां आमतौर पर प्रशासनिक और नियामक नियमों में भी ढील दी जाती है। इसके अलावा, इन गतिविधियों पर किसी प्रकार का सूचना आदान-प्रदान भी नहीं होता, जैसे कि कड़े बैंक गोपनीयता नियमों के कारण। ऐसे क्षेत्रों को " टैक्स हेवन " यानी कर स्वर्ग कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, जिन देशों ने अपनी कर नीतियों में बदलाव करके विदेशी पूंजी को आकर्षित करने की कोशिश की है, उन्हें टैक्स हेवन माना जा सकता है। देश टैक्स हेवन का उपयोग क्यों करते हैं ? टैक्स हेवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां के कानून और अन्य उपायों का इस्तेमाल अन्य देशों के कर नियमों से बचने या उन्हें दरकिनार करने के लिए किया जा सकता है। ऐसे देशों मे...

CPC धारा 151: उचितता और विशेष परिस्थितियों में आदेश प्रदान करना

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सिविल प्रक्रिया संहिता ( Civil Procedure Code - CPC ) की धारा 151 भारतीय सिविल प्रक्रिया के अनुसार न्यायालय को उसकी अधिकारिक और विधिक संवाद की शक्ति प्रदान करती है, जो अन्य किसी धारा के अंतर्गत नहीं पड़ती है। धारा 151 न्यायालय को उन स्थितियों में इसका उपयोग करने की अनुमति देती है जब कोई विशेष परिस्थिति में न्यायालय को अधिकारिक न्यायिक कार्रवाई करने की आवश्यकता होती है, लेकिन इसके लिए कोई अन्य धारा उपलब्ध नहीं होती है।   यह धारा आमतौर पर न्यायिक सुझाव, आदेश, और प्रक्रियाओं को परिसंचित करने के लिए उपयोग की जाती है जब कोई विशेष प्रकार की सटीक प्राधिकृति या नियम की आवश्यकता होती है जिसका उल्लंघन अनिवार्य है और जिसके लिए कोई अन्य धारा नहीं है।   कृपया ध्यान दें कि धारा 151 का उपयोग विशेष विधिक परिस्थितियों में होना चाहिए, और यह व्यावसायिक प्रक्रिया में नियमित रूप से नहीं होता है। https://consultingminds.blogspot.com/2023/10/cpc-151.html For consultancy services mail us at : advocateguptaabhinav@gmail.com