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कर स्वर्ग | Tax heavens | एचएनआई भारत क्यों छोड़ रहे हैं ? Why HNIs are leaving india ?

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                        टैक्स  हेवन  क्या है?  कई देशों और क्षेत्रों में, आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों को आकर्षित करने के लिए कर और गैर-कर प्रोत्साहन का उपयोग किया जाता है। ऐसे देश या क्षेत्र विदेशी निवेशकों को एक ऐसा वातावरण प्रदान करते हैं, जहां या तो कर बिल्कुल नहीं होते या केवल नाममात्र का कर लिया जाता है । इसके साथ ही, वहां आमतौर पर प्रशासनिक और नियामक नियमों में भी ढील दी जाती है। इसके अलावा, इन गतिविधियों पर किसी प्रकार का सूचना आदान-प्रदान भी नहीं होता, जैसे कि कड़े बैंक गोपनीयता नियमों के कारण। ऐसे क्षेत्रों को " टैक्स हेवन " यानी कर स्वर्ग कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, जिन देशों ने अपनी कर नीतियों में बदलाव करके विदेशी पूंजी को आकर्षित करने की कोशिश की है, उन्हें टैक्स हेवन माना जा सकता है। देश टैक्स हेवन का उपयोग क्यों करते हैं ? टैक्स हेवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां के कानून और अन्य उपायों का इस्तेमाल अन्य देशों के कर नियमों से बचने या उन्हें दरकिनार करने के लिए किया जा सकता है। ऐसे देशों मे...

जीएसटी कानून के तहत चालान जारी करने का तरीका | Manner of issuing invoice under GST Law | GST Challan | Tax Invoice

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RULES OF INVOICING जीएसटी कानून के तहत टैक्स इनवॉयस एक बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो बिक्री को प्रमाणित करता है। यह इनपुट टैक्स क्रेडिट के लिए महत्वपूर्ण है और साथ ही यह कराधान का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है । सीजीएसटी अधिनियम, 2017 का नियम 48 भारत में वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति के लिए चालान जारी करने के तरीके को निर्दिष्ट करता है ।  इस लेख में, हम इस नियम को विस्तार से समझेंगे और व्यावहारिक उदाहरणों के साथ इसकी व्याख्या करेंगे। सीजीएसटी नियम, 2017 के नियम 48 के अनुसार , टैक्स चालान(Tax invoice) निम्नलिखित तरीके से जारी किया जाना चाहिए: नियम 48 के उप-नियम (1) के अनुसार, माल(Goods) की आपूर्ति के मामले में चालान त्रितीय ( triplicate ) रूप में तैयार किया जाएगा, जिसमें शामिल होंगे:     मूल प्रति जिस पर "ORIGINAL FOR RECIPIENT"(प्राप्तकर्ता के लिए मूल) अंकित होगा।   द्वितीय प्रति जिस पर "DUPLICATE FOR TRANSPORTER"(परिवहनकर्ता के लिए द्वितीय) अंकित होगा।  तृतीय प्रति जिस पर "TRIPLICATE FOR SUPPLIER"(आपूर्तिकर्ता के लिए तृतीय ) अंकित होगा। आइये इसे एक ...

जीएसटी के तहत बिल ऑफ सप्लाई की मदें | Items of Bill of Supply under GST

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BILL OF SUPPLY RULES जीएसटी के तहत, हर आपूर्तिकर्ता को अपने लेन-देन के लिए उचित दस्तावेज जारी करने होते हैं। जब कर चालान (Tax Invoice) जारी करने की आवश्यकता नहीं होती, तो ‘बिल ऑफ सप्लाई’ (Bill of Supply) जारी किया जाता है। यह उन आपूर्तिकर्ताओं के लिए आवश्यक है जो या तो कर मुक्त (Exempt) आपूर्ति करते हैं या संरचना योजना (Composition Scheme) के तहत पंजीकृत हैं। इस ब्लॉग के माध्यम से हम आपूर्ति बिल से संबंधित प्रावधानों को समझेंगे : धारा 31(3)(सी) के अनुसार, बिल ऑफ सप्लाई में निम्नलिखित विवरण शामिल होने चाहिए : a) आपूर्तिकर्ता(Supplier) का नाम, पता और जीएसटीआईएन (GSTIN)  b) एक लगातार क्रमांक(Consecutive serial number), जो सोलह अक्षरों से अधिक न हो, एक या एक से अधिक श्रृंखलाओं में, जिसमें अक्षर, संख्याएं, विशेष अक्षर, या उनका संयोजन हो, और जो वित्तीय वर्ष के लिए विशिष्ट हो। उदाहरण के लिए, एक बिल ऑफ सप्लाई का क्रमांक इस प्रकार हो सकता है: BOS/2024-25/001, INV/2024-25/001, IN/2024-25/001 इत्यादि ।  c) जारी करने की तिथि  d) प्राप्तकर्ता का नाम, पता और जीएसटीआईएन (यदि प...

Items of Tax Invoice under GST | जीएसटी के तहत टैक्स चालान की मदें

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DETAILS OF TAX INVOICE                                                                                                                                GST कानून के तहत , प्रत्येक पंजीकृत व्यक्ति को की गई बिक्री के लिए एक टैक्स चालान (Tax Invoice) जारी करना आवश्यक है। सीजीएसटी नियम, 2017 के नियम 46 के अनुसार और सीजीएसटी अधिनियम की धारा 31 के संदर्भ में , टैक्स चालान(Tax Invoice) में निम्नलिखित विवरण शामिल होने चाहिए : 1. आपूर्तिकर्ता का नाम , पता और जीएसटीआईएन (GSTIN) 2. एक लगातार क्रमांक जो सोलह अक्षरों से अधिक न हो , एक या एक से अधिक श्रृंखलाओं(Series) में , जिसमें अक्षर(alphabets) , संख्याएं(numbers) या विशेष अक्षर(special characte...

ई-इनवॉइस की अवधारणा और विशेषताएँ | Concept and Rules of E-Invoice

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    ई - इनवॉइस(E-Invoice) : ई - इनवॉइस एक इलेक्ट्रॉनिक रूप में तैयार की गई वित्तीय चालान (invoice) होता है , जो व्यापारिक लेन - देन की पुष्टि करता है। यह इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में होता है और आमतौर पर ई - इनवॉइस पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाता है।   जीएसटी के तहत ई - इनवॉयसिंग के नियम : मानदंड(Norms) : जीएसटी के तहत विशेष मानदंडों के आधार पर कुछ व्यापारों को ई - इनवॉइसिंग करना अनिवार्य होता है।   ई - इनवॉयस बनाना : ई - इनवॉयस बनाने के लिए व्यापारी को ई - इनवॉयस वितरण प्रणाली ( IRP ) का उपयोग करना होता है। ई - इनवॉयस को ई - इनवॉयस प्रारूप ( जिसे IRN कहा जाता है ) के साथ बनाना होता है।   ई - इनवॉयस की सहमति : व्यापारी और उपभोक्ता के बीच ई - इनवॉयस की सहमति डिजिटल रूप में प्राप्त करनी होती है।   स्टैंडर्ड फॉर्मेट : ई - इनवॉयस को निर्धारित स्टैंडर्ड फॉर्मेट में तैयार करना होता है , जो जीएसटी के नियमों के अनुसार होता है।   ...