कर स्वर्ग | Tax heavens | एचएनआई भारत क्यों छोड़ रहे हैं ? Why HNIs are leaving india ?

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                        टैक्स  हेवन  क्या है?  कई देशों और क्षेत्रों में, आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों को आकर्षित करने के लिए कर और गैर-कर प्रोत्साहन का उपयोग किया जाता है। ऐसे देश या क्षेत्र विदेशी निवेशकों को एक ऐसा वातावरण प्रदान करते हैं, जहां या तो कर बिल्कुल नहीं होते या केवल नाममात्र का कर लिया जाता है । इसके साथ ही, वहां आमतौर पर प्रशासनिक और नियामक नियमों में भी ढील दी जाती है। इसके अलावा, इन गतिविधियों पर किसी प्रकार का सूचना आदान-प्रदान भी नहीं होता, जैसे कि कड़े बैंक गोपनीयता नियमों के कारण। ऐसे क्षेत्रों को " टैक्स हेवन " यानी कर स्वर्ग कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, जिन देशों ने अपनी कर नीतियों में बदलाव करके विदेशी पूंजी को आकर्षित करने की कोशिश की है, उन्हें टैक्स हेवन माना जा सकता है। देश टैक्स हेवन का उपयोग क्यों करते हैं ? टैक्स हेवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां के कानून और अन्य उपायों का इस्तेमाल अन्य देशों के कर नियमों से बचने या उन्हें दरकिनार करने के लिए किया जा सकता है। ऐसे देशों मे...

जीएसटी के तहत बिल ऑफ सप्लाई की मदें | Items of Bill of Supply under GST


BILL OF SUPPLY RULES

जीएसटी के तहत, हर आपूर्तिकर्ता को अपने लेन-देन के लिए उचित दस्तावेज जारी करने होते हैं। जब कर चालान (Tax Invoice) जारी करने की आवश्यकता नहीं होती, तो ‘बिल ऑफ सप्लाई’ (Bill of Supply) जारी किया जाता है। यह उन आपूर्तिकर्ताओं के लिए आवश्यक है जो या तो कर मुक्त (Exempt) आपूर्ति करते हैं या संरचना योजना (Composition Scheme) के तहत पंजीकृत हैं। इस ब्लॉग के माध्यम से हम आपूर्ति बिल से संबंधित प्रावधानों को समझेंगे :

धारा 31(3)(सी) के अनुसार, बिल ऑफ सप्लाई में निम्नलिखित विवरण शामिल होने चाहिए:

a) आपूर्तिकर्ता(Supplier) का नाम, पता और जीएसटीआईएन (GSTIN) 

b) एक लगातार क्रमांक(Consecutive serial number), जो सोलह अक्षरों से अधिक न हो, एक या एक से अधिक श्रृंखलाओं में, जिसमें अक्षर, संख्याएं, विशेष अक्षर, या उनका संयोजन हो, और जो वित्तीय वर्ष के लिए विशिष्ट हो। उदाहरण के लिए, एक बिल ऑफ सप्लाई का क्रमांक इस प्रकार हो सकता है: BOS/2024-25/001, INV/2024-25/001, IN/2024-25/001 इत्यादि । 

c) जारी करने की तिथि 

d) प्राप्तकर्ता का नाम, पता और जीएसटीआईएन (यदि पंजीकृत हो) या अद्वितीय(Unique) पहचान संख्या 

e) वस्तुओं और सेवाओं के लिए एचएसएन कोड (HSN Code), उदाहरण के लिए यदि आप कपड़े बेच रहे हैं, तो संबंधित HSN कोड 5208 होगा। 

f) वस्तुओं या सेवाओं का विवरण 

g) वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति का मूल्य(Value of Supply), जिसमें छूट या रियायत (यदि कोई हो) को ध्यान में रखा गया हो 

h) आपूर्तिकर्ता या उसके अधिकृत प्रतिनिधि(authorised signatory) का हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर, आदि।

बशर्ते कि नियम 46 के प्रावधान यथावश्यक परिवर्तनों सहित आपूर्ति बिल पर लागू होंगे।

बशर्ते कि किसी गैर-कर योग्य आपूर्ति के संबंध में वर्तमान में लागू किसी अन्य अधिनियम के तहत जारी कोई कर चालान या कोई अन्य समान दस्तावेज अधिनियम के प्रयोजनों के लिए आपूर्ति बिल के रूप में माना जाएगा।

बशर्ते कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अनुसार आपूर्ति का इलेक्ट्रॉनिक बिल जारी करने के मामले में आपूर्तिकर्ता या उसके अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होगी।

बशर्ते कि सरकार, परिषद की सिफारिशों पर, अधिसूचना द्वारा, उसमें उल्लिखित शर्तों और प्रतिबंधों के अधीन, यह निर्दिष्ट कर सकती है कि आपूर्ति बिल में त्वरित प्रतिक्रिया (क्यूआर) कोड होगा।


आपूर्ति बिल के आवश्यक विवरण नीचे दी गई तालिका(Table) से भी समझे जा सकते हैं :

क्रमांक

विवरण

1.

आपूर्तिकर्ता का नामपता और जीएसटीआईएन (GSTIN)

2.

एक लगातार क्रमांक (Consecutive serial number)

3.

जारी करने की तिथि (Date of Issue)

4.

प्राप्तकर्ता का नामपता और जीएसटीआईएन (यदि पंजीकृत होया अद्वितीय पहचान संख्या

5.

वस्तुओं और सेवाओं के लिए एचएसएन कोड (HSN Code)

6.

वस्तुओं या सेवाओं का विवरण

7.

आपूर्ति का मूल्य (Value of Supply), जिसमें छूट या रियायत (यदि कोई होको ध्यान में रखा गया हो

8.

आपूर्तिकर्ता या उसके अधिकृत प्रतिनिधि का हस्ताक्षर या डिजिटल हस्ताक्षर


  • जीएसटी कानून के तहत निम्नलिखित मामलों में आपूर्तिकर्ता द्वारा बिल ऑफ सप्लाई जारी किया जाता है:

  1. छूट प्राप्त आपूर्ति के मामले में (In case of Exempt supply) - यदि कोई आपूर्तिकर्ता ऐसी वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति करता है जो जीएसटी से मुक्त हैं, तो उन्हें बिल ऑफ सप्लाई जारी करना आवश्यक है।
  2. संरचना योजना (Composition Scheme) के मामले में  - जीएसटी की संरचना योजना के अंतर्गत आने वाले पंजीकृत व्यवसायों को कर चालान जारी करने की अनुमति नहीं होती, इसलिए उन्हें बिल ऑफ सप्लाई जारी करना आवश्यक होता है।
  3. एक अप्रवासी कर योग्य व्यक्ति द्वारा (In case of Non-Resident Taxable person) - यदि कोई अप्रवासी कर योग्य व्यक्ति जो जीएसटी के तहत पंजीकृत है, भारत में आपूर्ति करता है, तो उसे बिल ऑफ सप्लाई जारी करना आवश्यक हो सकता है।











📢 आपकी राय: क्या आपको यह जानकारी उपयोगी लगी? कृपया अपने विचार हमें कमेंट सेक्शन में बताएं! 😊

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