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कर स्वर्ग | Tax heavens | एचएनआई भारत क्यों छोड़ रहे हैं ? Why HNIs are leaving india ?

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                        टैक्स  हेवन  क्या है?  कई देशों और क्षेत्रों में, आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों को आकर्षित करने के लिए कर और गैर-कर प्रोत्साहन का उपयोग किया जाता है। ऐसे देश या क्षेत्र विदेशी निवेशकों को एक ऐसा वातावरण प्रदान करते हैं, जहां या तो कर बिल्कुल नहीं होते या केवल नाममात्र का कर लिया जाता है । इसके साथ ही, वहां आमतौर पर प्रशासनिक और नियामक नियमों में भी ढील दी जाती है। इसके अलावा, इन गतिविधियों पर किसी प्रकार का सूचना आदान-प्रदान भी नहीं होता, जैसे कि कड़े बैंक गोपनीयता नियमों के कारण। ऐसे क्षेत्रों को " टैक्स हेवन " यानी कर स्वर्ग कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, जिन देशों ने अपनी कर नीतियों में बदलाव करके विदेशी पूंजी को आकर्षित करने की कोशिश की है, उन्हें टैक्स हेवन माना जा सकता है। देश टैक्स हेवन का उपयोग क्यों करते हैं ? टैक्स हेवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां के कानून और अन्य उपायों का इस्तेमाल अन्य देशों के कर नियमों से बचने या उन्हें दरकिनार करने के लिए किया जा सकता है। ऐसे देशों मे...

सूचना का अधिकार: अर्थ और महत्व | Meaning and Importance of Right to Information

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RTI का मतलब होता है " सूचना का अधिकार " ( Right to Information ). यह एक कानूनी अधिकार है जिसके तहत नागरिक सरकारी संगठनों , सरकारी निकायों और अन्य संगठनों से जुड़ी जानकारी को प्राप्त कर सकते हैं , जो सरकार द्वारा वित्तपोषित होते हैं। RTI आमतौर पर एक मौलिक मानव अधिकार माना जाता है और एक पारदर्शी और उत्तरदायी सरकार के कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।   इसकी प्रमुख विशेषताएँ और महत्व निम्नलिखित हैं :   पारदर्शिता और उत्तरदायता : RTI सरकारी कार्यवाहिक और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को बढ़ावा देता है। इसके माध्यम से नागरिक सरकार के क्रियाकलापों और निर्णयों का संवीक्षण कर सकते हैं , जिससे सरकारी अधिकारियों के बीच उत्तरदायता बढ़ता है।   नागरिकों को सशक्त बनाना : RTI व्यक्तियों को सरकारी क्रियाकलापों , नीतियों और व्यय के बारे में जानकारी प्राप्त करने के उपकरण प्रदान करके सशक्त करता है। इसके माध्यम से नागरिक सशक्त दिमागी प्रक्रिया...

ई-इनवॉइस की अवधारणा और विशेषताएँ | Concept and Rules of E-Invoice

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    ई - इनवॉइस(E-Invoice) : ई - इनवॉइस एक इलेक्ट्रॉनिक रूप में तैयार की गई वित्तीय चालान (invoice) होता है , जो व्यापारिक लेन - देन की पुष्टि करता है। यह इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में होता है और आमतौर पर ई - इनवॉइस पोर्टल के माध्यम से जारी किया जाता है।   जीएसटी के तहत ई - इनवॉयसिंग के नियम : मानदंड(Norms) : जीएसटी के तहत विशेष मानदंडों के आधार पर कुछ व्यापारों को ई - इनवॉइसिंग करना अनिवार्य होता है।   ई - इनवॉयस बनाना : ई - इनवॉयस बनाने के लिए व्यापारी को ई - इनवॉयस वितरण प्रणाली ( IRP ) का उपयोग करना होता है। ई - इनवॉयस को ई - इनवॉयस प्रारूप ( जिसे IRN कहा जाता है ) के साथ बनाना होता है।   ई - इनवॉयस की सहमति : व्यापारी और उपभोक्ता के बीच ई - इनवॉयस की सहमति डिजिटल रूप में प्राप्त करनी होती है।   स्टैंडर्ड फॉर्मेट : ई - इनवॉयस को निर्धारित स्टैंडर्ड फॉर्मेट में तैयार करना होता है , जो जीएसटी के नियमों के अनुसार होता है।   ...