कर स्वर्ग | Tax heavens | एचएनआई भारत क्यों छोड़ रहे हैं ? Why HNIs are leaving india ?

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                        टैक्स  हेवन  क्या है?  कई देशों और क्षेत्रों में, आर्थिक और वित्तीय गतिविधियों को आकर्षित करने के लिए कर और गैर-कर प्रोत्साहन का उपयोग किया जाता है। ऐसे देश या क्षेत्र विदेशी निवेशकों को एक ऐसा वातावरण प्रदान करते हैं, जहां या तो कर बिल्कुल नहीं होते या केवल नाममात्र का कर लिया जाता है । इसके साथ ही, वहां आमतौर पर प्रशासनिक और नियामक नियमों में भी ढील दी जाती है। इसके अलावा, इन गतिविधियों पर किसी प्रकार का सूचना आदान-प्रदान भी नहीं होता, जैसे कि कड़े बैंक गोपनीयता नियमों के कारण। ऐसे क्षेत्रों को " टैक्स हेवन " यानी कर स्वर्ग कहा जाता है। दूसरे शब्दों में, जिन देशों ने अपनी कर नीतियों में बदलाव करके विदेशी पूंजी को आकर्षित करने की कोशिश की है, उन्हें टैक्स हेवन माना जा सकता है। देश टैक्स हेवन का उपयोग क्यों करते हैं ? टैक्स हेवन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां के कानून और अन्य उपायों का इस्तेमाल अन्य देशों के कर नियमों से बचने या उन्हें दरकिनार करने के लिए किया जा सकता है। ऐसे देशों मे...

जीएसटी कानून के तहत अपील | APPEALS UNDER GST

 

APPEAL UNDER GST
अपीलीय तंत्र(Appellate mechanism) :

  • करदाता(Taxpayer) या विभाग(Department) इस अधिनियम या जीएसटी अधिनियमों के अंतर्गत निर्णयों के खिलाफ अपील कर सकते हैं।
  • अपील तीन महीने (इस अधिनियम के लिए) या छह महीने (राज्य/संघ क्षेत्र जीएसटी के लिए) के भीतर दाखिल करनी होगी।
  • अपील को स्वीकार करने के लिए विवादित राशि(Disputed amount) का 10% अग्रिम (Pre-deposit) जमा करना आवश्यक है।
  • अपील की प्रक्रिया के दौरान शेष राशि(Remaining amount) अपने आप रोक दी जाएगी।

    • विभागीय अपील(Departmental Appeal) :कोई भी पीड़ित व्यक्ति धारा 107 के तहत अपील दायर कर सकता है। अपील निम्नलिखित व्यक्तियों द्वारा दायर की जा सकती है:
    a) पंजीकृत व्यक्ति(Registered Person)

    b) अपंजीकृत व्यक्ति(Unregistered Person)

    c) उचित अधिकारी(Proper Officer)

    जहां उचित अधिकारी को धारा 107(2) के तहत अपील दायर करने का निर्देश दिया जाता है, वहां विभागीय अपील दायर की जाती है। यदि कोई निर्णय या आदेश राजस्व के हितों के प्रतिकूल है, तो विभाग के पास बचाव के निम्नलिखित तरीके हैं, अर्थात्:

    a) धारा 108 के तहत पुनरीक्षण कार्यवाही शुरू करना

    b) धारा 73 या 74 के तहत नोटिस जारी करना; या

    c) धारा 107(3) के तहत विभागीय अपील दायर करना

    यह आयुक्त(Commissioner) या संयुक्त आयुक्त(Joint-Commissioner) है जो बचाव की उपरोक्त पंक्ति से निर्णय लेगा। उचित अधिकारी को न्यायनिर्णयन आदेश की तिथि से 6 महीने के भीतर विभागीय अपील दायर करना आवश्यक है।


    • न्यायाधिकरणों के समक्ष अपील(Appeal before Tribunal) :दूसरे स्तर पर अपील प्राधिकरण के आदेश या पुनरीक्षण प्राधिकरण द्वारा पारित पुनरीक्षण आदेश के विरुद्ध न्यायाधिकरण के समक्ष अपील दायर की जा सकती है। जीएसटी कानून के अनुसार दो स्तरीय न्यायाधिकरण अर्थात राष्ट्रीय पीठ/क्षेत्रीय पीठ और राज्य पीठ/क्षेत्रीय पीठ की स्थापना का प्रावधान है।न्यायाधिकरण निम्नलिखित महत्वपूर्ण मामलों से संबंधित निर्णय दे सकता है :
    • मूल निर्णय को पुष्टि(confirm), संशोधन(modify), या निरस्त(annul) कर सकता है।
    • किसी भी शुल्क(fee) या दंड(Penalty) को बढ़ा नहीं सकता जब तक अपीलकर्ता को अपने मामले को पेश करने का अवसर न दिया जाए।

    • उच्च न्यायालय में अपील(Appeal before High Court) : यदि राज्य पीठ या क्षेत्रीय पीठ के आदेश से कोई भी पक्ष (विभाग या पक्ष) असंतुष्ट है तो वह 180 दिनों की अवधि के भीतर उच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है। अपील केवल तभी स्वीकार की जा सकती है जब उसमें कानून का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न(Substantial question of law) शामिल हो, हालांकि तथ्यों के प्रश्न(Question of Facts) के मामले में न्यायाधिकरण निर्णय लेने के लिए अंतिम प्राधिकारी है।उच्च न्यायालय के आदेश या निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है। राष्ट्रीय न्यायाधिकरण/क्षेत्रीय न्यायाधिकरण के किसी भी आदेश के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में सीधी अपील की जा सकती है। यहाँ यह ध्यान देने योग्य बात है कि राष्ट्रीय न्यायाधिकरण/क्षेत्रीय न्यायाधिकरण अपीलों पर विचार करता है यदि विवाद या विवादित मुद्दों में से कोई एक आपूर्ति के स्थान से संबंधित हो।

    • सर्वोच्च न्यायालय में(Appeal before Supreme Court) : अपील: उच्च न्यायालय के आदेश या निर्णय के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील की जा सकती है। राष्ट्रीय न्यायाधिकरण/क्षेत्रीय न्यायाधिकरण के किसी भी आदेश के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में सीधी अपील की जा सकती है। यहाँ यह ध्यान देने योग्य बात है कि राष्ट्रीय न्यायाधिकरण/क्षेत्रीय न्यायाधिकरण अपीलों पर विचार करता है यदि विवाद या विवादित मुद्दों में से कोई एक आपूर्ति के स्थान(Place of Supply) से संबंधित हो।





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