आयकर अधिनियम में नकद खर्च की सीमा | Cash Expenditure limit in income tax act | Section 40(A)(3) of Income Tax Act, 1961 | Cashless Economy
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व्यापार के स्वरूप में बदलाव के साथ ही आयकर अधिनियम में भी लगातार परिवर्तन हो रहे हैं। भारत को नकद रहित अर्थव्यवस्था(Cashless Economy) बनाने के उद्देश्य से, व्यवसायिक खर्चों पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं, जो आयकर अधिनियम की धारा 40(A)(3) के प्रावधानों में निहित हैं।
इसके अनुसार, यदि कोई करदाता(Taxpayer) किसी व्यक्ति को एक ही दिन में नकद में भुगतान करता है, जो कि ₹10,000 से अधिक है और यह भुगतान खाता पेयी चेक, बैंक ड्राफ्ट, इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नहीं किया गया है, तो ऐसे खर्च को व्यावसायिक खर्च के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी।
- इन प्रावधानों को निम्नलिखित रूप में संक्षेपित किया जा सकता है:
- खर्च एक ही दिन में, नकद में, और एक ही व्यक्ति को किया गया होना चाहिए।
- खर्च का भुगतान खाता पेयी चेक(Account Payee Cheque), बैंक ड्राफ्ट, नेट बैंकिंग, UPI, या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से न होकर नकद में किया गया होना चाहिए।
- खर्च की राशि ₹10,000 से कम होनी चाहिए।
- ₹10,000 से अधिक नकद में किए गए खर्च को व्यावसायिक खर्च(Business Expenditure) नहीं माना जाएगा और इसे 'व्यवसाय या पेशे से लाभ और अर्जन(Profits and gains of business or Profession)' के तहत दावा नहीं किया जा सकेगा।
- आइये इसे एक तालिका(Table) की सहायता से समझते हैं :
|
Category |
Regular
Business Expenses |
Goods
Carriage Leasing (Truck/Lorry Hire) |
|
Cash
Limit Per Day |
₹10,000 |
₹35,000 |
|
Mode
of Payment Allowed |
Account Payee
Cheque, Draft, Electronic Transfer |
Account Payee
Cheque, Draft, Electronic Transfer |
|
Cash
Payment Allowed? |
No
(Disallowed as an expense) |
No
(Disallowed if above limit) |
|
Exception
Available? |
Yes (for
no-banking areas, emergencies, etc.) |
Yes (same
exceptions apply) |
- इसके अलावा, यदि खर्च प्लाइंग(Plying), हायरिंग(Hiring) और लीजिंग ऑफ गुड्स कैरिज( Leasing of goods carriages) अर्थात खर्च माल ढोने वाले वाहनों का संचालन, किराए पर लेना और पट्टे पर लेना इत्यादि, के लिए किया गया है, तो इस नकद भुगतान की सीमा को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹35,000 कर दिया गया है।
- आइये इस प्रावधान को कुछ केस स्टडीज़ की मदद से समझें ताकि यह और अधिक स्पष्ट हो सके :
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